मणिपुर और कुकीलैण्ड की लड़ाई: कारण, इतिहास और आज की स्थिति
मणिपुर और "कुकीलैण्ड" की लड़ाई किस वजह से है?
1. पहचान (Identity) का मुद्दा
मणिपुर में ज़्यादातर मैतेई (Meitei) लोग रहते हैं, जो घाटी (इंफाल वैली) में बसते हैं।
कुकी (Kuki) और कुछ दूसरी जनजातियाँ (Tribal communities) ज़्यादातर पहाड़ी इलाकों में रहती हैं।
कुकी समाज लंबे समय से “Kukiland” (यानि एक अलग इलाका/राज्य) की मांग करता रहा है, जहाँ उनपर उनका खुद का अधिकार हो।
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2. हाल की चिंगारी (2023 से शुरू हुई हिंसा)
अप्रैल 2023 में मणिपुर हाई कोर्ट ने कहा कि मैतेई समुदाय को “अनुसूचित जनजाति (ST)” का दर्जा दिया जा सकता है।
ST दर्जे से सरकारी नौकरी, ज़मीन और शिक्षा में आरक्षण (reservation) और अधिकार मिलते हैं।
पहाड़ी जनजातियाँ (कुकी समेत) डर गईं कि अगर मैतेई को भी ST का दर्जा मिल गया, तो उनके अधिकार और ज़मीन पर कब्ज़ा हो जाएगा।
इसी वजह से 3 मई 2023 को आदिवासी समुदायों और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा भड़क उठी।
हजारों घर जला दिए गए, लोग बेघर हो गए और सैकड़ों की मौत हुई।
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3. गहरे कारण (Root Causes)
कारण समझाइश
ST दर्जा मैतेई को ST देने की मांग – कुकी और दूसरी जनजातियाँ इसके खिलाफ हैं।
ज़मीन का अधिकार घाटी और पहाड़ी इलाकों की ज़मीन पर कब्ज़े और कानूनों पर झगड़ा।
राजनीतिक ताकत विधानसभा और प्रशासन में किसका दबदबा रहे – इस पर खींचतान।
धर्म और संस्कृति मैतेई ज़्यादातर हिन्दू, जबकि कुकी ज़्यादातर ईसाई हैं – इससे भी अलगाव बढ़ता है।
विद्रोह और सीमा (Border Issue) मणिपुर की म्यांमार सीमा से हथियार और उग्रवादी गुट जुड़े हुए हैं, जो हिंसा को और भड़का रहे हैं।
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👉 सीधी भाषा में कहें तो:
मैतेई लोग आरक्षण (ST) चाहते हैं।
कुकी और अन्य पहाड़ी जनजातियाँ इसे अपना हक़ छिनना मानती हैं।
इसके साथ ज़मीन, राजनीति और धर्म की खींचतान भी जुड़ गई है।
यही सब मिलकर
“कुकीलैण्ड बनाम मणिपुर” की लड़ाई का कारण है।
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